अवतरण - गुरुदत्त Avtaran - Hindi book by - Gurudutt
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गुरुदत्त


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प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
आईएसबीएन : 9781613010389 मुखपृष्ठ : Ebook
पृष्ठ :590 पुस्तक क्रमांक : 9552

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हिन्दुओं में यह किंवदंति है कि यदि महाभारत की कथा की जायें तो कथा समाप्त होने से पूर्व ही सुनने वालों में लाठी चल जाती है।

क्यों?

 

हिन्दुओं में यह किंवदंति है कि यदि महाभारत की कथा की जायें तो कथा समाप्त होने से पूर्व ही सुनने वालों में लाठी चल जाती है।

एक बार हमारे मुहल्ले के एक मन्दिर में महाभारत की कथा रखायी गयी। यह वे दिन थे, जब आर्यसमाज और सनातनधर्म सभा में शास्त्रार्थों की धूम थी। मुहल्ले के कुछ सनातनधर्मी युवको में धर्म ने जोश मारा और वे हिन्दुओं की प्रसिद्ध धर्म-पुस्तक महाभारत की कथा कराने लगे।उस समय एक वयोवृद्ध पण्डित ने कहा था, ‘‘ये नौजवान ठीक नहीं कर रहे। इसका परिणाम ठीक नहीं होगा। हिन्दुओं में रामायण की कथा होती है, परन्तु महाभारत की नहीं।’’

मैं इस बात को इस प्रकार समझा कि प्रचलित हिन्दू-धर्म में कुछ है, जो महाभारत में लिखे हुए के अनुकूल नहीं। मेरे विस्मय का ठिकाना नहीं रहा, जब कथा में आदि पर्व के समाप्त होने से पूर्व ही एक दिन श्रोतागणों में मुक्का-मुक्की हो गयी। बात पुलिस तक गयी और बहुत कठिनाई से दोनों दलों में सन्धि करायी गयी। तब से मैं इस विषय पर बहुत मनन करता हूँ। कई बार महाभारत पढ़ा है। इस किंवदंति और महाभारत के पाठ की, मेरे मन पर हुई प्रति-क्रिया का परिणाम यह पुस्तक है।

–         गुरुदत्त


गुरुदत्त

(8 दिसम्बर 1894 - 8 अप्रैल 1989 )

शिक्षा :- एम.एस-सी.।

लाहौर (अब पाकिस्तान) में जन्मे श्री गुरुदत्त हिन्दी साहित्य के एक देदीप्यमान नक्षत्र हैं। वह उपन्यास-जगत् के बेताज बादशाह थे। अपनी अनूठी साधना के बल पर उन्होंने लगभग दो सौ से अधिक उपन्यासों की रचना की और भारतीय संस्कृति का सरल एवं बोधगम्य भाषा में विवेचन किया। साहित्य के माध्यम से वेद-ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का उनका प्रयास निस्सन्देह सराहनीय रहा है।

श्री गुरुदत्त के साहित्य को पढ़कर भारत की कोटि-कोटि जनता ने सम्मान का जीवन जीना सीखा है।

उनके सभी उपन्यासों के कथानक अत्यन्त रोचक, भाषा, अत्यन्त सरल और उद्देश्य केवल मनोरंजन ही नहीं, अपितु जन-शिक्षा भी है। राष्ट्रसंघ के साहित्य-संस्कृति संगठन ‘यूनेस्को’ के अनुसार श्री गुरुदत्त हिन्दी भाषा के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले लेखक थे।

उपन्यास :- गुण्ठन, चंचरीक, आशा निराशा, सम्भवामि युगे युगे-भाग-1, सम्भवामि युगे युगे भाग-2, अवतरण, कामना, अपने पराये, आकाश-पाताल, अनदेखे बन्धन, घर की बात, आवरण, जीवन ज्वार, महाकाल, यह संसार, वाम मार्ग, दो भद्र पुरुष, बनवासी, प्रारब्ध और पुरुषार्थ, विश्वास, माया जाल, पड़ोसी, नास्तिक, प्रगतिशील, सभ्यता की ओर, मेघ वाहन, भगवान भरोसे, ममता, लुढ़कते पत्थर, लालसा, दिग्विजय, धर्मवीर हकीकत राय, दासता के नये रूप, स्वराज्य दान, नगर परिमोहन, भूल, स्वाधीनता के पथ पर, विश्वासघात, देश की हत्या, पत्रलता, भारतवर्ष का संक्षिप्त इतिहास, पथिक, प्रवंचना, पाणिग्रहण, परित्राणाय साधूनाम, गृह-संसद, सब एक रंग, विक्रमादित्य साहसांक, गंगा की धारा, सदा वत्सले मातृभूमे, पंकज, सागर-तरंग, भाव और भावना, दो लहरों की टक्कर-भाग 1, दो लहरों की टक्कर-भाग 2, सफलता के चरण, मैं हिन्दू हूँ, मैं न मानूँ, स्व-अस्तित्व की रक्षा, प्रतिशोध, भाग्य का सम्बल, बन्धन शादी का, वीर पूजा, वर्तमान दुर्व्यवस्था का समाधान हिन्दू राष्ट्र, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की अन्तिम यात्रा, सुमति, युद्ध और शान्ति-भाग-1, युद्ध और शान्ति-भाग-2, जमाना बदल गया-भाग-1, जमाना बदल गया-भाग-2, जमाना बदल गया-भाग-3, जमाना बदल गया भाग-4, खण्डहर बोल रहे हैं-भाग-1, खण्डहर बोल रहे हैं-भाग-2, खण्डहर बोल रहे हैं-भाग-3, प्रेयसी, परम्परा, धरती और धन, हिन्दुत्व की यात्रा, अस्ताचल की ओर भाग-1, अस्ताचल की ओर-भाग-2, अस्ताचल की ओर-भाग-3, भाग्य चक्र, द्वितीय विश्वयुद्ध, भैरवी चक्र, भारत में राष्ट्र, बुद्धि बनाम बहुमत, धर्म तथा समाजवाद, विकार, अग्नि परीक्षा, जगत की रचना, अमृत मन्थन, जिन्दगी, श्रीराम।

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