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उपयोगी हिंदी व्याकरण

भारतीय साहित्य संग्रह

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प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2021
पृष्ठ :400
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 12546
आईएसबीएन :1234567890

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हिंदी के व्याकरण को अधिक गहराई तक समझने के लिए उपयोगी पुस्तक

कारक


कारक शब्द का शाब्दिक अर्थ है क्रिया को करने वाला अर्थात् क्रिया को पूरी करने में किसी-न-किसी भूमिका को निभाने वाला। व्याकरण में भी बिल्कुल ऐसा ही अर्थ है। किसी भी क्रिया को संपन्न अथवा पूरा करने में जो भी संज्ञा आदि शब्द संलग्न होते हैं, वे अपनी अलग-अलग प्रकार की भूमिकाओं के अनुसार अलग-अलग कारकों में वाक्य दिखाई पड़ते हैं। जैसे —

मोहन बल्ले से गेंद खेल रहा है।

इस वाक्य में खेलना क्रिया से संज्ञा शब्द मोहन बल्ला गेंद संलग्न हैं। क्रिया खेलना की संपन्नता अर्थात् पूरे होने में इन तीनों का महत्वपूर्ण योगदान है। खेलना क्रिया तभी संपन्न हो पाएगी जब कोई व्यक्ति जैसे — मोहन खेलने वाला हो, कोई वस्तु जैसे — गेंद हो जिसे खेला जाए और कोई साधन जैसे — बल्ला (हाथ हो) जिससे गेंद खेला जाए। इन भूमिकाओं की प्रकृति अलग-अलग है। व्याकरण में ये भूमिकाएँ कारकों के अलग-अलग भेदों जैसे — कर्ता, कर्म, करण आदि से स्पष्ट होती हैं। (ऊपर दिए वाक्य में मोहन कर्ता, गेंद कर्म, बल्ला करण है।)

क्रिया से संलग्न शब्दों को, इस प्रकार, इन भूमिकाओं में से किसी-न-किसी भूमिका को निभाना आवश्यक होता है, दूसरे शब्दों में, वाक्य स्थित संज्ञा के लिए कारक एक अनिवार्य व्याकरणिक कोटि है। अर्थात् कारक वह व्याकरणिक कोटि है जो यह स्पष्ट करती है कि संज्ञा आदि शब्द वाक्य में स्थित क्रिया के साथ किस प्रकार की भूमिका से संबद्ध हैं।

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