बिखरे मोती - सुभद्रा कुमारी चौहान Bikhre Moti - Hindi book by - Subhadra Kumari Chauhan
लोगों की राय

कहानी संग्रह >> बिखरे मोती

बिखरे मोती

सुभद्रा कुमारी चौहान


E-book On successful payment file download link will be available
प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :184
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 7135
आईएसबीएन :9781613010433

Like this Hindi book 5 पाठकों को प्रिय

6 पाठक हैं

सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के समय यत्र तत्र लिखी गई कहानियाँ

 

सन् १९॰४ में जन्मी और भारत के स्वाधीन होने तक अपनी कलम के माध्यम से न केवल महिलाओं की आवाज बनी रहीं, बल्कि अपनी लेखनी से स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को अपना कर्तव्य स्मरण करवाती रहीं। उनकी कविताओं और कहानियों में अधिकांशतः तत्कालीन समाज में महिलाओं और अन्य सामाजिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया जाता रहा है।

जमींदारी प्रथा के चलते सामान्य जन अंग्रेजों और जमींदारों के दोहरे प्रहार से हमेशा पीड़ित रहते थे। अपनी कविताओं और कहानियों में सुभद्रा जी लगातार उन पर जबाबी हमले करती रहीं।

संग्रह की कहानियाँ

  • भग्नावशेष
  • होली
  • पापी पेट
  • मझली रानी
  • परिवर्तन
  • दृष्टिकोण
  • कदम्ब के फूल
  • किस्मत
  • मछुए की बेटी
  • एकादशी
  • आहुति
  • थाती
  • अमराई
  • अनुरोध
  • ग्रामीणा


लोगों की राय

No reviews for this book