सुमति - गुरुदत्त Sumati - Hindi book by - Gurudutt
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उपन्यास >> सुमति

सुमति

गुरुदत्त


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प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :265
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 7598
आईएसबीएन :9781613011331

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बुद्धि ऐसा यंत्र है जो मनुष्य को उन समस्याओं को सुलझाने के लिए मिला है।

भूमिका

भाग्य और पुरुषार्थ में क्या प्रबल है? यह विवाद नया नहीं है। यह आदिकाल से चला आता है। दोनों पक्ष-विपक्षों में प्रमाण तथा युक्तियाँ दी जाती हैं। कदाचित् यह विवाद अनन्तकाल तक चलता ही रहेगा। क्योंकि मनुष्य की दृष्टि अतिसीमित है। इसकी दृष्टि की सीमा जन्म और मरण से पीछे अथवा आगे नहीं जाती। जो लोग केवल दृष्टि पर भरोसा करते हैं, वे जीवन के बहुत से रहस्यों से अनभिज्ञ रह जाते हैं। यह भाग्य और परिश्रम का विवाद उनका ही खड़ा किया हुआ है।

बुद्धि ऐसा यंत्र है जो मनुष्य को उन समस्याओं को सुलझाने के लिए मिला है, जिनमें प्रमाण और अनुभव नहीं होता। परन्तु सब यंत्रों की भाँति इसकी सफाई, इसको तेल देना तथा इसकी मरम्मत होती रहनी चाहिए।

सफाई के लिए तो यम और नियमों का विधान है और तेल देने तथा मरम्मत करने के लिए सत्संग् तथा सत्-साहित्य सहायक होते हैं। इन दोनों को प्राप्त करने का माध्यम शिक्षा है। माध्यम स्वं कुछ नहीं करता। जैसे बिजली का तार तो कुछ नहीं, यद्यपि यह महान् शक्ति के लिए मार्ग प्रस्तुत करता है। इसमें पॉज़िटिव विद्युत का प्रवाह भी हो सकता है और नेगेटिव का भी। दोनों शक्ति के रूप में हैं। परन्तु इससे जो मशीनें चलती हैं उनकी दिशा का निश्चय होता है। इसी प्रकार शिक्षा के माध्यम से सत्संग और सत्-साहित्य भी प्राप्त हो सकता है और कुसंग तथा कुसाहित्य भी। सत्संग और सत्-साहित्य से सुमति प्राप्त होती है और कुसंग तथा कुत्सित साहित्य से दुर्मति।

इस पुस्तक का यही विषय है। शिक्षा के माध्यम से सत्संग तथा सत्साहित्य कार्य करते हैं। इससे सुमति प्राप्त होती है। तब पुरुषार्थ सौभाग्य का सहायक हो जाता है।

– गुरुदत्त


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