Chandrakanta Santati - 6 - Hindi book by - Devkinandan Khatri - चन्द्रकान्ता सन्तति - 6 - देवकीनन्दन खत्री
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चन्द्रकान्ता सन्तति - 6

देवकीनन्दन खत्री

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प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :237
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 8404
आईएसबीएन :978-1-61301-031-0

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चन्द्रकान्ता सन्तति 6 पुस्तक का ईपुस्तक संस्करण...

आठवाँ बयान


तीसरे दिन पुनः दरबार हुआ और कैदी लोग लाकर हाजिर किये गये। महाराज सुरेन्द्रसिंह का लिखाया हुआ फैसला सभों के सामने तेजसिंह ने पढ़कर सुनाया। सुनते ही कमबख्त दारोगा, जैपाल, हरनामसिंह वगैरह रोने कलपने, चिल्लाने और महाराज से कहने लगे कि इसी जगह हम लोगों का सर काट लिया जाय या जो चाहे महाराज सजा दें, मगर हम लोगों को गोपालसिंह के हवाले न करें।

कैदियों ने बहुत सर पीटा, मगर उनकी कुछ न सुनी गयी, जो कुछ महाराज ने फैसला लिखाया था, उसी मुताबिक कार्रवाई की गयी और इस फैसले को सभी ने पसन्द किया।

इन सब कामों से छुट्टी पाने के बाद एक बहुत बड़ा जलसा किया गया और कई दिन तक खुशी मनाने के बाद सब कोई बिदा कर दिया गया। राजा गोपालसिंह कैदियों को साथ लेकर जमानिया चले गये, लक्ष्मीदेवी उनके साथ गयी और तेजसिंह तथा और भी बहुत से आदमी महाराज की तरफ से उनको साथ पहुँचाने के लिए गये! जब वे लौट आये, तब औरतों को साथ लेकर राजा बीरेन्द्रसिंह, इन्द्रजीतसिंह और आनन्दसिंह वगैरह पुनः तिलिस्म में गये और उन्हें तिलिस्म की खूब सैर करायी कुछ दिन बाद रोहतासगढ़ के तहखाने की भी उन लोगों को सैर करायी और फिर सब कोई हँसी-खुशी से दिन बिताने लगे।

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