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उपन्यास >> पाणिग्रहण

पाणिग्रहण

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :651
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 8566
आईएसबीएन :9781613011065

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संस्कारों से सनातन धर्मानुयायी और शिक्षा-दीक्षा तथा संगत का प्रभाव


दोनों फिर लौट आये। वे जाकर एम्बुलैंस कार के समीप खड़े हुए तो ऐना ने उनको देख लिया। ऐना ने अपने पास बैठे हुए एक आदमी को, जो डॉक्टर प्रतीत होता था, कुछ कहा। उसने रजनी और इन्द्र को संकेत से बुला लिया। रजनी और इन्द्र समीप आये तो डॉक्टर ने साथ जा रहे पुलिसमैन को कहा, ‘‘ये भी डॉक्टर हैं। इनको भी आने दो।’’

वे दोनों भी बैठ गये। ऐना ने बहुत धीमी आवाज में कहा, ‘‘मुझको विष दिया गया है। यद्यपि डॉक्टर ने उलटी कराकर विष निकाल दिया है, पर उससे दुर्बलता बहुत हो गयी है। डॉक्टर की सम्मति है कि मुझको हस्पताल में पहुँचा दिया जाये।’’

इन्द्र ने पूछ लिया, ‘‘तुमने बयान दिए हैं?’’

‘‘नहीं। वे हस्पताल में जाकर होंगे।’’

‘‘हम तो इस घटना के होने को रोकने के लिए तुमसे मिलने आए थे।’’

इस पर डॉक्टर विस्मय से इन्द्र का मुख देखने लगा। जब गाड़ी चलने लगी तो उसने गाड़ी को रुकवा दिया और पूछा, ‘‘तुम इस घटना के होने को जानते थे?’’

‘‘हम अपने प्रोफेसर का सन्देश लेकर ऐना के पास आये थे। प्रोफेसर ने हमको इसे सचेत करने के लिए भेजा था। उनका विचार था कि ऐना को मार डालने का यत्न किया जायेगा।’’

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