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उपन्यास >> पाणिग्रहण

पाणिग्रहण

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :651
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 8566
आईएसबीएन :9781613011065

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संस्कारों से सनातन धर्मानुयायी और शिक्षा-दीक्षा तथा संगत का प्रभाव


‘‘एम्बुलैंस और पुलिस के आने से पूर्व ही नवाब साहब की मृत्यु हो चुकी थी। मुझको कै पर कै हो रही थीं। पहले तो सोड़ा पी लेने के कारण और बाद में दवाई के असर के कारण मैं बच गयी, परंतु नवाब साहब अधिक पी जाने के कारण विष का शिकार हो गये।

‘‘पुलिस को संदेह था कि मैंने ही नवाब साहब को विष दिया है, परन्तु आपके और डॉक्टर सैंडरसन के बयानों से मैं बच गयी हूँ और संदेह किसी गाँव के व्यक्ति पर किया गया है। नवाब साहब के साहबजादे अनवर साहब पकड़ लिए गए हैं और मेरा विचार है कि इस समय हवालात में हैं।’’

इस सब परिस्थिति को सुनकर रजनी और इन्द्र विस्मय में मुख देखते रह गये। इस पर ऐना ने कहा–‘‘शराब, जो बोतल में बची थी, पुलिस परीक्षा के लिए ले गयी है। यह तो निश्चय ही है कि विष के विषय में नवाब साहब को कुछ विदित नहीं था। पर होता तो वे स्वयं कभी भी न पीते। पुलिस गाँव में गयी थी और शेष दस बोतलों को भी सील करके ले आयी है। उस शराब की भी परीक्षा होगी।’’

‘‘तो क्या यह विष अनवर ने मिलाया है? कदाचित् मिलाया तुम्हारे लिये ही हो और देहान्त हो गया नवाब साहब का?’’

‘‘यह रहस्य तो जाँच करने पर ही खुल सकेगा। मैं बच गयी हूँ। यह सब आपके समय पर आ जाने के कारण ही हुआ है।’’

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