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उपन्यास >> पाणिग्रहण

पाणिग्रहण

गुरुदत्त

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :651
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 8566
आईएसबीएन :9781613011065

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संस्कारों से सनातन धर्मानुयायी और शिक्षा-दीक्षा तथा संगत का प्रभाव

5

रजनी को ऐना ने टिमोथी की अवस्था बताई और साथ ही उसका संदेश दिया तो रजनी उससे मिलने आ पहुँची। टिमोथी एक आरामकुर्सी पर कोठी के लॉन में बैठी थी। नौकरानी उसके पाँव मसल रही थी। वह रजनी को हाथ में बैग लिये आते देख बहुत ही प्रसन्न हुई। उसके आते ही उसे कुर्सी पर बिठाकर उसका धन्यवाद करने लगी।

‘‘मिस स्मिथ! अपने विवाह के अवसर पर हमको बुलाया भी नहीं?’’

मेरे पति की इच्छा थी कि विवाह के समय मैं और वह, बस दोनो ही हों, जिसमें इस रस्म में दिखावा बिलकुल न रहे। उसके पीछे भोज के समय एक सीमित संख्या में मेहमान बुलाने थे। इस कारण इच्छा रखते हुए भी तुम और इन्द्र को बुला नहीं सकी।’’

‘‘खैर! मेरी भी जरूरत तो पड़ी है। यह पाँव क्यों मसलवा रही हो?’’

‘‘एक तो इसमें सूजन-सी हो गयी है, दूसरे पाँवों से असह्य जलन होती रहती है।’’

‘‘पेशाब टैस्ट करवाया है?’’

‘‘अब एक मास से तो नहीं करवाया।’’

‘‘तुरन्त पेशाब टैस्ट करवाना चाहिये। मुझको ऐसा लग रहा है कि पेशाब में अलब्यूमन आता है?’’

‘‘इसमें क्या होता है?’’

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