लोगों की राय

उपन्यास >> श्रीकान्त

श्रीकान्त

शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :598
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9719
आईएसबीएन :9781613014479

Like this Hindi book 7 पाठकों को प्रिय

337 पाठक हैं

शरतचन्द्र का आत्मकथात्मक उपन्यास


फिर उसी तरह सन्नाटे में समय बीतने लगा। सहसा मैं बोल उठा, “एक बात तुम्हें अब तक नहीं जताई लक्ष्मी।”

उसने चुपके से कहा, “कौन-सी बात?”

इतना ही कहने में संस्कारवश पहले तो जरा संकोच हुआ, मगर मैं रुका नहीं, बोला, “मैंने आज से अपने को बिल्कुल तुम्हारे ही हाथ सौंप दिया है, अब भलाई-बुराई का सारा भार तुम्हीं पर है।”

यह कहकर मैंने उसके मुख की ओर देखा कि उस टिमटिमाते हुए उजाले में वह मेरे मुँह की ओर चुपचाप एकटक देख रही है। उसके बाद जरा हँसकर बोली, “तुम्हें लेकर मैं क्या करूँगी? तुम न तो तबला ही बजा सकते हो, न सारंगी ही बजा सकोगे और...”

मैंने कहा, “ 'और' क्या? पान-तम्बाकू हाज़िर करना? नहीं, यह काम तो मुझसे हरगिज़ नहीं हो सकता।”

“लेकिन पहले के दो काम?”

मैंने कहा, “आशा दो तो शायद कर भी सकूँ।” कहकर मैंने भी जरा हँस दिया।

सहसा राजलक्ष्मी उत्साह से बैठी और बोली, “मज़ाक नहीं, सचमुच बजा सकते हो?”

मैंने कहा, “आशा करने में दोष क्या है?”

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book