Muchhonwali - Hindi book by - Madhukant - मूछोंवाली - मधुकान्त
लोगों की राय

कहानी संग्रह >> मूछोंवाली

मूछोंवाली

मधुकान्त

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :149
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9835
आईएसबीएन :9781613016039

Like this Hindi book 0

‘मूंछोंवाली’ में वर्तमान से दो दशक पूर्व तथा दो दशक बाद के 40 वर्ष के कालखण्ड में महिलाओं में होने वाले परिवर्तन को प्रतिबिंबित करती हैं ये लघुकथाएं।

45

लाडली


‘बच्चे मन के सच्चे‘ इस विश्वास के अनुसार माँ ने दीपा से पूछा- ‘जरा बता तो इस बार अपने घर में कौन आएगा...राधा या कृष्ण...?‘

‘राधा‘ अनायास दीपा के मुंह से निकल गया।

दीपा की बात सुनकर माँ उदास हो गयी। एक लड़का आ जाता तो आदर्श परिवार बन जाता और रोज-रोज से पीछा छूटता, परन्तु क्या करे भगवान की मर्जी- माँ मन मसोस कर रह गयी।

अगले महीने माँ ने दीपा से फिर वही प्रश्न पूछा तो उसने कुछ सोचकर कह दिया, ’मम्मी हमारे घर कृष्ण आएंगे।’ माँ का चेहरा खिल उठा। उसने तभी बेटी को लड्डू निकालकर खिलाया दीपा ने माँ की खुशी को पकड़ लिया। अब माँ कभी भी यह प्रश्न पूछती तो दीपा एकदम कह देती, मम्मी हमारे घर कृष्ण जन्म लेगा।

दीपा की बात झूठ निकली और एक दिन घर में राधा ही आ गयी। घर में दो राधा आ गयी। सब अपना-अपना भाग्य लाती हैं- माँ ने अपने मन को समझा लिया- आजकल तो सब कामों में लड़कियां आगे हैं। रिश्ते वाले भी घर से माँगकर ले जाते हैं। सरकार भी लाडली योजना में आर्थिक लाभ देती है-फिर चिंता क्या है... सोचते-सोचते उसकी उदासी मिट गयी और बगल में लेटी हुई अपनी लाडली को उसने सीने से चिपका लिया।


0 0

...पीछे | आगे....

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book