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व्यवहारिक मार्गदर्शिका >> वर्तमान चुनौतियाँ और युवावर्ग

वर्तमान चुनौतियाँ और युवावर्ग

श्रीराम शर्मा आचार्य

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :60
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9848
आईएसबीएन :9781613012772

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मेरी समस्त भावी आशा उन युवकों में केंद्रित है, जो चरित्रवान हों, बुद्धिमान हों, लोकसेवा हेतु सर्वस्वत्यागी और आज्ञापालक हों, जो मेरे विचारों को क्रियान्वित करने के लिए और इस प्रकार अपने तथा देश के व्यापक कल्याण के हेतु अपने प्राणों का उत्सर्ग कर सकें।


अपने भाग्य के निर्माता हम स्वयं


पूर्व जन्म, वर्तमान जन्म और पुनर्जन्म के सिद्धान्त को हमें मानना ही होगा। साथ ही कर्मफल भोगने की धारणा पर अटूट विश्वास भी रखना होगा। हमारा कोई भी कर्म निष्फल नहीं होता। देर-सबेर उसका फल हमें मिलता ही है। हम किसी का गाली दें, तो वह हमें थप्पड़ मारकर तुरंत बदला लेता है, यहाँ कर्म का फल तुरंत मिल गया। कुछ उल्टा-सीधा खा पी लें तो उसका फल कुछ दिनों या वर्षों बाद शरीर में रोग के रूप में फूटता है। इसी प्रकार कुछ कर्मों का फल इसी जीवन में मिल जाता है, जबकि कुछ का अगले जन्मों में। भगवान् के यहाँ देर है पर अंधेर नहीं।

भगवान् को हम किसी भी नाम से पुकारें, उसे निराकार मानें या साकार, पर यह तो मानना ही होगा कि सब कुछ उसी की कृपा से होता है। ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किंच जगत्यां जगत् - इस संसार में जो कुछ भी है, कण-कण में, रोम-रोम में, ईश्वर का वास है। वही सारे संसार का नियंता है, नियामक है। हम सारे संसार को भले ही धोखा दे लें पर भगवान् को धोखा नहीं दे सकते। हमारे कर्मों का फल तो हमें अवश्य ही भोगना पड़ेगा।

हमारे जीवन में जो भी अच्छी-बुरी परिस्थितियां आती हैं वे भी हमारे कर्मों का फल हैं। पूर्व जन्मों के कर्मों के अनुसार ही हमें इस जन्म में विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना होता है। कोई अच्छे समृद्ध संस्कारी परिवार में जन्म लेता है, कोई दुराचारी या निर्धन परिवार में। किसी को अनेकानेक सुख- सुविधाएँ सरलता से उपलब्ध होती हैं, तो कोई सदैव अभाव व कष्ट में ही रहता है। इस सबके लिए हम किसी अन्य को दोष नहीं दे सकते। अब भी यदि हम खराब कर्म करते रहेंगे, तो अगले जन्म में हमें जीव-जंतुओं की न जाने कितनी योनियों में कष्ट भोगने पड़ेंगे और फिर से मनुष्य शरीर मिला तो संभव है कि उस समय और अधिक विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़े। यदि अच्छे कर्म करेंगे तो अगले जीवन में और अधिक सुखद परिस्थितियाँ प्राप्त होंगी।

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