मूल्य रहित पुस्तकें >> उपयोगी हिंदी व्याकरण उपयोगी हिंदी व्याकरणभारतीय साहित्य संग्रह
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हिंदी के व्याकरण को अधिक गहराई तक समझने के लिए उपयोगी पुस्तक
2, निश्चयवाचक स्रर्वनाम
जिस सर्वनाम से दूरवर्ती या समीपवर्ती व्यक्तियों, प्राणियों, वस्तुओं और
घटना-व्यापारों का निश्चित बोध होता है, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
दूरवर्ती के लिए वह तथा समीपवर्ती के लिए यह का प्रयोग होता है। जब अंगुली
उठाकर या अन्य इशारे से किसी के प्रति संकेत देते हैं तब इसे संकेत वाचक
सर्वनाम भी कहते हैं, जैसे — क्या गड़बड़ कर रहे हो? तुम्हारी कलम तो वह है
और मेरी कलम यह। रूप-रचना की दृष्टि से अन्य पुरुष और निश्चयवाचक/संकेतवाचक
में कोई भेद नहीं है, तीनों में एक समान यह, वह रूप है।
सर्वनाम यह का प्रयोग कुछ पहले कहे (और कभी-कभी बाद में कहे जानेवाले) वाक्य
या कथन के संकेतित करने में भी होता है। जैसे —
भारत कृषि प्रधान देश है, यह सब जानते हैं।
मैं यह चाहता हूँ कि आप सब बड़े होकर समाज में ऊँचा स्थान पाएँ।
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
जिस सर्वनाम से किसी निश्चित व्यक्ति, प्राणी या वस्तु आदि का बोध नहीं होता
है, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। भाषा-व्यवहार में ऐसी स्थिति तब आती
है, जब किसी व्यक्ति आदि का आभास तो आप को है, किंतु आप उसके संज्ञा – नाम के
संबंध में निश्चित नहीं है। इस स्थिति में व्यक्ति के लिए कोई का और अप्राणी
आदि के लिए कुछ का प्रयोग करते हैं, जैसे —
दरवाजा खटका है, कोई आ रहा है।
दूध में कुछ पड़ गया है, उसे निकाल कर पीना।
मोहन का कुछ खो गया है, तभी टॉर्च से ढूँढ़ रहा है।
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