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कहानी संग्रह >> हिन्दी की आदर्श कहानियाँ हिन्दी की आदर्श कहानियाँप्रेमचन्द
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प्रेमचन्द द्वारा संकलित 12 कथाकारों की कहानियाँ
‘नवाब कैसा नमक खाते हैं?’
‘एक मन का डला रखकर उस पर पानी की धार छोड़ी जाती है। जब घुलते-घुलते छोटा सा टुकड़ा रह जाता है तब बादशाह के खाने में वह नमक इस्तेमाल होता है।’
अँगरेज अधिकारी मुस्कराता चला गया। क्यों? ओह! हम लोगों के समझने के योग्य यह भेद नहीं।
उसी रसरंग की दीवारों के भीतर अब सरकारी दफ्तर खुल गये हैं। और अमन कैसर बाग मानो रंडुए की तरह खड़ा उस रसीली रात की याद में सिर धुन रहा है।
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