मरणोत्तर जीवन - स्वामी विवेकानन्द Maranottar Jeevan - Hindi book by - Swami Vivekanand
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मरणोत्तर जीवन

स्वामी विवेकानन्द


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प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :65
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 9587
आईएसबीएन :9781613013083

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ऐसा क्यों कहा जाता है कि आत्मा अमर है?

  • देह वह वस्तु नहीं और न मन ही वह वस्तु है।
  • देह का नाश तो प्रतिक्षण होता रहता है और मन तो सदा बदलता रहता है। देह तो एक संघात है और उसी तरह मन भी।……
  • परन्तु स्थूल जड़ भूत के इस क्षणिक आवरण के परे, मन के सूक्ष्म आवरण के भी परे, मनुष्य का सच्चा-स्वरूप नित्य मुक्त सनातन आत्मा अवस्थित है।

- स्वामी विवेकानन्द


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