कविता संग्रह >> यादें यादेंनवलपाल प्रभाकर
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बचपन की यादें आती हैं चली जाती हैं पर इस कोरे दिल पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं।
ऊँचा उठाना है
हाथ को हाथ में बांध कर
चैन हमने बनानी है,
देकर गरीबों को सहारा
नीची जाति ऊपर उठानी है ।
सभी को मिले समान अधिकार
सभी को मिले रोटी पानी बार-बार
सबको मिले एक जगह पर सामान
सभी करें बराबर मेहनत
समय की है यही पुकार
ऐसे ही तो बना सकेंगे हम
हँसता खिलता प्यारा हिन्दुस्तान।
हँसता खिलता प्यारा हिन्दुस्तान।
हँसता खिलता प्यारा हिन्दुस्तान।
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