Yaaden - Hindi book by - Naval Pal Prabhakar - यादें - नवलपाल प्रभाकर
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यादें

नवलपाल प्रभाकर

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9607
आईएसबीएन :9781613015933

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बचपन की यादें आती हैं चली जाती हैं पर इस कोरे दिल पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं।



यादें


बचपन की यादें
आती हैं चली जाती हैं
पर इस कोरे दिल पर
अमिट छाप छोड़ जाती हैं।

बचपन में यूं खुले-धड़ल्ले
घुमने जाना आसमां नीचे
हरे भरे मैदानों में
चारों तरफ फैली हरियाली
फले फूल गुलिस्तानों में
आज भी फिर क्यों नहीं है ,
खेतों और खलिहानों में
जो सपनों में आती है।
पर इस कोरे दिल पर
अमिट छाप छोड़ जाती हैं।

बचपन का वो दायरा
न छोटा न कोई बड़ा
सबको समझना एक समान
चाचा ताऊ या हो दादा
फिर क्यों पहना अहम् का चोला
ईश्वर ने हमको बड़ा किया
सोच कर यह बात दिल में
सनसनी सी दौड़ जाती है।
पर इस कोरे दिल पर
अमिट छाप छोड़ जाती हैं।

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