Yaaden - Hindi book by - Naval Pal Prabhakar - यादें - नवलपाल प्रभाकर
लोगों की राय

कविता संग्रह >> यादें

यादें

नवलपाल प्रभाकर

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9607
आईएसबीएन :9781613015933

Like this Hindi book 7 पाठकों को प्रिय

31 पाठक हैं

बचपन की यादें आती हैं चली जाती हैं पर इस कोरे दिल पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं।



सांझ और सवेरा


काली सांझ, उजला सवेरा
लेकर फिर से आ गई ,
आज की सुबह तो जैसे
मन को मेरे ही भा गई।

आज का यह सुहाना दिन
मानो दिन, दिन न होकर
अजीब तोहफा है मेरे लिए
अरसों बाद मिला यह दिन
न जाऐगा जाम पिए बिन
भुला था मगर याद आ गई।
आज की सुबह तो जैसे
मन को मेरे ही भा गई।

हर मंजिल हर डगर पर
घुमता फिरता था मैं अकेला
जैसे पागलों की तरह
था मेरा जीवन अलबेला
मगर मुझे यह सांझ तो
नया जीवन दिला गई।
आज की सुबह तो जैसे
मन को मेरे ही भा गई।

0 0 0

...पीछे | आगे....

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book