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मूछोंवाली

मधुकान्त

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :149
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9835
आईएसबीएन :9781613016039

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‘मूंछोंवाली’ में वर्तमान से दो दशक पूर्व तथा दो दशक बाद के 40 वर्ष के कालखण्ड में महिलाओं में होने वाले परिवर्तन को प्रतिबिंबित करती हैं ये लघुकथाएं।

27

पोयम


मंजु पास के नर्सरी स्कूल में जाने लगी थी। स्कूल की अंग्रेजी की पोयम जब वह घर आकर मम्मी को सुनाती, तो उनको बहुत खुशी होती। जब भी कोई नया व्यक्ति घर में आता, मम्मी मंजु से पोयम सुनवाती। छोटे-छोटे हाथों के संकेत से तुतलाती आवाज में पोयम बहुत मीठी लगती।

कभी मंजु पोयम नहीं सुनाती तो मम्मी को लालच देना पड़ता।

उस दिन मंजु के मामा आए थे। मम्मी ने उनके सामने मंजु को पोयम सुनाने के लिए कहा। मंजु चुप रही। मम्मी ने उसे चाकलेट, कैम्पा और फ्रूटी का लालच दिया, फिर भी मंजु चुप रही।

मम्मी ने उसे खिलौने और नए कपड़े दिलवाने का लालच दिया, तब मंजु ने पोयम सुनाई, ’जोनी-जोनी यस पापा। इंटीग शूगर नो पापा, टैलिंग ए लाई नो पापा। ओपन यूअर माउथ-हा-हा-हा-।’ कविता सुनकर मम्मी का चेहरा गर्व से चमक उठा। मामा ने उसे गोदी में उठा लिया। तुरन्त मंजु मचलकर गोदी से उतर गयी और चाकलेट दिलाने के लिए अकड़ गयी।

‘मंजु, चाकलेट में तो शुगर होता है।’मामा ने समझाने का प्रयत्न किया।

मंजु कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी। वह तो लगातार ‘चाकलेट के लिए चिल्लाए जा रही थी। वह तभी शान्त हुई जब मम्मी ने उसके लिए बाजार से चाकलेट मंगवाकर दिया।


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