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अमेरिकी यायावर

योगेश कुमार दानी

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उत्तर पूर्वी अमेरिका और कैनेडा की रोमांचक सड़क यात्रा की मनोहर कहानी


कोई बात नहीं, अब वापस जाने, अथवा यहीं अधिक समय तक इतजार करने से तो यही अच्छा था कि फेशबुक पर देख कर पता किया जाये कि मेरी एन इस समय “आनलाइन” थी या नहीं? इससे उसके कार्यक्रम का पता चल ही जाने वाला था। मैंने खिड़की के बाहर देखते हुए अपने सेल फोन पर अभी  “डाटा प्लान” को आन किया और मेरी एन से संपर्क साधने को उन्मुख हुआ। वह इस समय फेशबुक पर सक्रिया नहीं थी, इसका अर्थ यही लगाया जा सकता था कि वह हो सकता है कि रास्ते में हो। मैं सोचने लगा कि ऐसा ही हो तभी फायदा है, अन्यथा मेरा यहाँ आना व्यर्थ था।
बीते सत्र के बारे में सोचते हुए मेरी दृष्टि नेपथ्य में कहीं खो गई। कुछ समय पश्चात् मैंने अपनी दृष्टि के कोने पर अनुभव किया किसी महिला का शरीर जिसकी चाल योरोपियन लोगों की तरह थी मेरी दृष्टि की सीमा में आया। यहाँ के एकाकी जीवन में अन्य लोगों को आते-जाते हुए देखते रहने के कारण अब मैं यहाँ के काकेशियन (योरोपीय उद्भव) स्त्री-पुरुष, एफ्रो-अमेरिकन (अफ्रीकी उद्भव) स्त्री-पुरुष, चाइनीज (चीन) केवल स्त्रियाँ, भारतीय स्त्री-पुरुष को उनकी चाल से पहचान लेने लगा हूँ। मेरा अनुमान अंधेरे-उजाले दोनों परिस्थितियों में अधिकांशतः सही निकलता है, क्योंकि इन सभी वर्गों के लोगों की चाल एक विशिष्ट प्रकार की होती है। अभी-भी मैं चाइनीज पुरुषों और काकेशियन पुरुषों की चाल को सही तरह पहचानने में गड़बड़ कर जाता हूँ, पर पहले लिखे अन्य वर्गों में तो यह पहचान आसान है।

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