सभी आयुवर्ग के पाठकों के लिये प्रेरक एवं मार्गदर्शक कहानियों का अनुपम संग्रह

">
लोगों की राय

नई पुस्तकें >> प्रेरक कहानियाँ

प्रेरक कहानियाँ

डॉ. ओम प्रकाश विश्वकर्मा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2020
पृष्ठ :240
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 15422
आईएसबीएन :978-1-61301-681-7

Like this Hindi book 0

सभी आयुवर्ग के पाठकों के लिये प्रेरक एवं मार्गदर्शक कहानियों का अनुपम संग्रह

मानवता का आदर

ऐसा प्रचलित है कि नेपोलियन बोनापार्ट ने अनेक राजाओं को जीता था और वह उनसे विशेष प्रकार के आश्वासन लेता था, जिससे भविष्य में फिर उन पर विजय प्राप्त करने की आवश्यकता न रहे।

एक बार योरोप का एक राजा, जिसे नेपोलियन ने पराजित किया था और उससे आश्वासन भी लिया था, वह जाकर नेपोलियन के किसी शत्रु राजा से मिल गया और उसने एक प्रकार से विद्रोह कर दिया।

उसके इस व्यवहार पर नेपोलियन को बड़ा क्रोध आया। उसे विश्वासघात का दण्ड देने के लिए उसने विद्रोही राजा पर आक्रमण कर दिया। विद्रोही राजा की राजधानी के लोग नेपोलियन की वीरता से भली-भाँति परिचित थे। उसकी विशाल सेना द्वारा आक्रमण किये जाने पर वे अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपने कीकोशिश करने लगे।

राजा भी भयभीत होकर अपने परिवार के साथ भागकर किसी अज्ञात स्थान पर जाकर छिप गया। किन्तु उसका एक राजकुमार जो अस्वस्थ था, उसे वह अपने राजमहल में ही छोड़ गया।

नेपोलियन को जब राजा के भाग जाने का समाचार मिला तो उसने राजमहल को तोप के गोलों से उड़ा देने का आदेश दिया। फिर क्या धड़ाधड़ तोप के गोले राजमहलपर बरसने लगे।

अपने प्राणों की रक्षा के लिए अस्वस्थ राजकुमार प्रासाद में इधर-उधर छिपने का यत्न करने लगा। राजमहल के सब द्वार बन्द थे। यह देखकर राजकुमार को अपने जीवन की आशा जाती हुई दिख रही थी। वह पुनःअपनी रोग-शैया पर जाकर लेट गया।

किसी प्रकार नेपोलियन तक यह समाचार पहुँच गया कि अस्वस्थ राजकुमार भीतर बन्द पड़ा है। उसने सेना को तत्काल आक्रमण रोकने के लिए आदेश दे दिया। सेनापति को यह आदेश सुनकर आश्चर्य हो रहा था।

सेनापति नेपोलियन के शिविर में गया और बोला, "महाराज! आपने आक्रमण रुकवा कर उचित नहीं किया। इससे सेना का उत्साह भंग हो रहा है, सैनिक स्वयं को अपमानित समझ रहे हैं।"

"सेनापति! आप ठीक कह रहे हैं, कदाचित इससे सेना का अपमान हुआ हो किन्तु मैं मानवता का अपमान नहीं कर सकता। राजप्रासाद में राजकुमार असहाय अवस्था में पड़ा है। असहायों पर वीरता दिखाना वीरों का कार्य नहीं है।"

असहाय राजकुमार को सुरक्षित बाहर निकाला गया और तोप से गोले दाग कर राजप्रासाद को ध्वस्त कर दिया गया।  

¤ ¤

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book