श्री दुर्गा सप्तशती - लक्ष्मीकान्त पाण्डेय Sri Durga ShaptShati - Hindi book by - Laxmikant Pandey
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श्री दुर्गा सप्तशती

डॉ. लक्ष्मीकान्त पाण्डेय


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प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :212
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 9644
आईएसबीएन :9781613015889

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श्री दुर्गा सप्तशती काव्य रूप में

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श्रीदुर्गासप्तशती (दोहा-चौपाई)

माँ भगवती इस घोर कलिकाल में तापत्रयनिवारिणी शक्ति के रूप में व्याप्त हैं। वस्तुत: लालन-पालन का दायित्व माँ का है। परम शक्तिमयी माँ त्रिपुरसुन्दरी की अशेष कृपा से ही विश्व का भरण-पोषण हो रहा है। माँ की स्नेहिल छाया हर भक्त के लिए सर्वदा और सर्वत्र सुलभ है। उनका स्मरण मात्र करना पड़ता है। स्मरण मात्र से ही वे भक्तों के कल्याण हेतु तत्पर हो जाती हैं।

माँ की कृपा के लिए श्री दुर्गासप्तशती के पाठ का विधान सनातन है। भक्तजन दोनों नवरात्रों में तथा नित्य सप्तशती का पाठ करते हैं। संस्कृत न जानने वाले भक्तजनों को श्रीदुर्गासप्तशती के नित्य पाठ में कठिनाइयां आती हैं। इसके परिणाम स्वरूप भगवती जागरण के नाम पर कीर्तन-भजन के आयोजन तो होते हैं लेकिन उनमें विह्वलता की अपेक्षा मनोरंजन-सा प्रतीत होने लगता है। ऐसे भक्तों के लिए जगदम्बा के प्रसाद स्वरूप इस पुस्तक का प्रणयन हुआ है। नवरात्र में नित्य पाठ और सम्पुट लगा कर सामूहिक पाठ करने से शक्ति का जागरण होगा ऐसा विश्वास है।

भक्तजनों के स्नेह का परिणाम है कि पुस्तक का तीसरा संस्करण हुआ। इसके साथ ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं केलिए यह नेट संस्करण प्रकाशित किया जा रहा है जिसके लिए श्री अंबरीश शुक्ल साधुवाद के पात्र हैं। श्रद्धालु भक्तजनों से निवेदन है कि सप्तशती के पाठ से जो अनुभूति हो, उससे अवगत कराने की कृपा करें। पुस्तक की मूल प्रेरणा तो माँ भगवती ही हैं किन्तु उन्होंने जिन्हें माध्यम बनाया है उनमें मेरे पूज्य पिता पं० गंगा प्रसाद पाण्डेय वैद्य का स्नेह सर्वोपरि है।

- डॉ. लक्ष्मीकान्त पाण्डेय
लीलापुर खुर्द
कोटवा, इलाहाबाद

अनुक्रम

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